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आईजीयू के विद्यार्थी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण में हुए शामिल।

Published on: 16 Apr 2026

आईजीयू के विद्यार्थी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण में हुए शामिल।


इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के इतिहास विभाग के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी की। यह प्रतिष्ठित सम्मेलन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, श्रीमद् भगवद गीता अध्ययन केंद्र, इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च, नई दिल्ली तथा विजन कुरुक्षेत्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

सम्मेलन में देश-विदेश से पधारे विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं अकादमिक विशेषज्ञों ने कुरुक्षेत्र क्षेत्र से संबंधित प्राचीन, मध्यकालीन तथा आधुनिक इतिहास के विविध आयामों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। प्रस्तुत शोध पत्रों में सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक भूगोल, धार्मिक परंपराओं, सामाजिक संरचनाओं तथा पुरातात्विक साक्ष्यों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया, जिससे विद्यार्थियों को नवीन शोध प्रवृत्तियों एवं दृष्टिकोणों से परिचित होने का अवसर मिला।

इस अवसर पर इतिहास विभाग द्वारा विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए एक एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का भी आयोजन किया गया। इस भ्रमण के अंतर्गत प्रतिभागियों ने कुरुक्षेत्र के प्रमुख ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों—ज्योतिसर, ब्रह्मसरोवर तथा धरोहर म्यूज़ियम—का अवलोकन किया।

ज्योतिसर में विद्यार्थियों ने महाभारत से जुड़े ऐतिहासिक एवं दार्शनिक प्रसंगों की गहन जानकारी प्राप्त की, जहाँ परंपरागत रूप से भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता का उपदेश दिए जाने की मान्यता है। ब्रह्मसरोवर के दर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने इसकी धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्ता को समझा, जो भारतीय आस्था एवं परंपरा का एक प्रमुख केंद्र है। वहीं धरोहर म्यूजियम में हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक जीवन, परंपरागत कला एवं ऐतिहासिक विकास से संबंधित प्रदर्शनों ने विद्यार्थियों को अत्यंत प्रभावित किया।

इस शैक्षणिक गतिविधि का संचालन एवं मार्गदर्शन इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. बीरेंद्र सिंह एवं डॉ. अविनाश आर्य द्वारा किया गया। उनके नेतृत्व में विद्यार्थियों ने सम्मेलन में सक्रिय सहभागिता के साथ-साथ ऐतिहासिक स्थलों का गहन अध्ययन किया।

इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. विकास बत्रा ने कहा कि इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन एवं शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास, शोध क्षमता एवं व्यावहारिक ज्ञान को सुदृढ़ करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों को कक्षा के बाहर वास्तविक ऐतिहासिक स्रोतों एवं सांस्कृतिक धरोहरों से जोड़ते हैं, जिससे उनकी समझ अधिक व्यापक एवं गहन बनती है।

यह शैक्षणिक यात्रा न केवल विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन में सहायक सिद्ध हुई, बल्कि उनके अनुभवात्मक अधिगम को भी समृद्ध करने में महत्वपूर्ण रही। विभाग भविष्य में भी इस प्रकार की अकादमिक एवं शोधपरक गतिविधियों के आयोजन के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण एवं अवसर प्राप्त होते रहें।